सामूहिक निर्णय और वैचारिक साम्य के अभाव में संगठन बिखर जाते हैं–रामविलास प्रजापति

देवरिया – अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ उत्तर प्रदेश पूर्वांचल के अध्यक्ष रामबिलास प्रजापति ने कहा कि सामूहिक निर्णय और वैचारिक साम्य के अभाव में संगठन बिखर जाते हैं । यही कारण है कि विभिन्न जातियों में अनेक संगठन बने और बिखरते तथा निष्क्रिय होते गये।
बुद्ध ने कहा था कि जबतक किसी राज्य/ समुदाय द्वारा अपनी समस्याओं पर मिल-बैठकर कर चर्चा होती रहेगी और किसी खास मुद्दे पर सामूहिक निर्णय लेकर अनुशासन में रहकर उस निर्णय का अनुपालन किया जाता रहेगा तब तक उसका कोई बाल-बांका नहीं कर पायेगा, उसे परास्त नहीं कर सकता है। आज जो सामाजिक संगठन बने हैं उनमें इसी का अभाव है।इन संगठनों द्वारा सामूहिक निर्णय नहीं लिये जाते हैं। यदि निर्णय ले भी लिया गया तो उसका सही ढंग से अनुपालन नहीं हो पाता है।कभी कभी ऐसा होता है कि बैठकों में निर्णय के बाद जब संगठन के पदाधिकारी अपने क्षेत्र में जाते हैं तो वैचारिक मतभेद के कारण स्वयं के लाभ को देखते हुए अपनी सोच के अनुसार काम करने लगते हैं । उदाहरण के तौर पर आज भाजपा की सरकार है और तमाम सामाजिक संगठनों में भाजपा के भी लोग हैं।ऐसी दशा में यदि उस समाज के ऊपर जुल्म ज्यादती और अत्याचार होता है तो भाजपा कार्यकर्ता उस अन्याय अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं,उनका कहना होता है कि अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज कैसे उठाया जाय, धरना प्रदर्शन कैसे किया जाए। उदाहरण के लिए प्रजापति समाज के साथ हुई मैनपुरी और गोरखपुर की घटनाएं हैं ।ये घटनाएं भाजपा सरकार में हुई है और कोई भाजपा का कुम्हांर नेता इन घटनाओं के बिरूद्ध आवाज नहीं उठाया ।
पिछड़ी जातियों के लोगों के लिए आरक्षण अहम मुद्दा है किन्तु भाजपा मूलरूप से आरक्षण की बिरोधी है। भाजपा हरहाल में आरक्षण को खत्म कर देना चाहती है इसीलिए उसने सारी सरकारी संस्थाओं को प्राइवेट में देने का निर्णय लिया है। चूंकि प्राइवेट में आरक्षण लागू नहीं है इसलिए इसके द्वारा ऐसा किया जा रहा है । भाजपा ने कभी भी आरक्षण के पक्ष में न तो आवाज उठाया और न ही उसके लिए आगे कदम बढ़ाया फिर भी कुछ कुम्हांर सहित तमाम पिछड़ी जातियों के लोग निजी स्वार्थ में भाजपा का झण्डा ढो रहे है। डाक्टर लोहिया ने पिछड़ों के लिए ६० प्रतिशत आरक्षण की मांग उठायी थी।उस समय कांग्रेस के नेताओं ने खुलकर इसका बिरोध तो नही किया किंतु इसे कार्यान्वित भी नही होने दिया ।अब थोड़ी भाजपा पर नजर डालें। मुझे याद है कि पिछड़े वर्ग के लिए बने काका कालेलकर आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के मुद्दे पर भाजपा ने जनता पार्टी की सरकार गिरा दी और सन वह १९८० का लोकसभा चुनाव भाजपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा ।शर्त यह था कि मोरारजी देसाई द्वारा बनाए गए मण्डल कमीशन की रिपोर्ट को लागू न किया जाए।ऐसी दशा में भाजपा और उसके नेताओं से क्या उम्मीद कर सकते हैं ? मुझे यह भी याद है कि जब वीपी सिंह ने लालू, मुलायम, कांशीराम, शरदयादव, रामबिलास पासवान, चौधरी देवीलाल के दबाव में १९९० में मण्डल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की तो पूरे देश में भाजपा इसके सारे अनुषांगिक संगठनों और सवर्णो ने देश में तूफान मचा दिया था और इस २७प्रतिशत आरक्षण को वे हर हाल में खत्म करा देना चाहते थे। आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सवर्णो द्वारा ३३ याचिकाएं दायर की गई थी । कोई सवर्ण वकील आरक्षण के समर्थन में बहस करने के लिए तैयार नहीं था । किसी तरह लालू के प्रयास से राम जेठमलानी तैयार हुए और उन्होंने बहस किया।हम धन्यवाद देते हैं सपा कार्यकर्ताओं को को कि उन्होंने जान पर आकर आरक्षण का समर्थन किया और उसे बचा लिया । तभी से सवर्ण जातियां यादवों से खार खायी हुई है और समाज में इनके बिरूद्ध जहर उगल रही हैं ताकि अतिपिछड़ी जातियां यादवों से दूर रहेंऔर कभी एक जुट न होने पाएं । अतिपिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, अल्पसंख्यकों को भाजपा की चालाकी जाननी पड़ेगी अन्यथा पिछड़ों का भविष्य गर्त में चला जायेगा। यदि पुनः भाजपा की सरकार बन ग़यी तो भारत का वर्तमान संविधान तो निश्चित ही खत्म हो जायेगा तब हमें मनु के विधान के अनुसार रहना पड़ेगा । यदि आपको मनु के विधान के बारे में जानकारी न हो तो किसी वामसेफ वाले से पूछ लेना। मैं पिछड़े वर्ग के लोगों से अपील कर रहा हूं कि जो लिखा हूं उसको ठीक से पढ़ना और चिंतन करना।

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