जाति_आधारित_फैसला जब न्याय देने वाली अदालतें ही इस तरह के निर्णय देने लगें तो आप कहाँ जाइएगा?

जाति_आधारित_फैसला

जब न्याय देने वाली अदालतें ही इस तरह के निर्णय देने लगें तो आप कहाँ जाइएगा?

उत्तर प्रदेश प्रयागराज से विकास नन्द की खास रिपोर्ट

 

बहुत ही घटिया फैसला है ये। संवैधानिक तौर पर यह कहीं से सुसंगत नहीं। अगर इस निर्णय को सही माना जाय तो फिर

इसी तरह के मामले में जातीय/वर्ण आधार पर किसी क्षत्रिय वर्ण के आरोपी को उसी की (जिसके साथ घटना घटित हुई है) रक्षा करने और और ब्राह्मण वर्ण के आरोपी को उसी को कथा सुनाने और पूजा पाठ कराने का निर्णय अदालत दे देंगी क्या?

व्यवहारिक सजा देने का यह बिलकुल मतलब नहीं कि किसी को जाति आधारित परम्परागत कार्य करने की सजा दी जाय। यह संवैधानिक नियमों और मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है।

अब जरा आंकड़ों पर गौर करें तो गांव में 2000 हजार महिलाएं हैं। यदि 100 महिलाओं ने सिर्फ अपनी साड़ी धुलने व प्रेस करने के लिए प्रतिदिन दी तो उसका पूरा परिवार (6-8 लोगों का) लग जाएगा तो भी शायद नहीं कर पाएगा। वह कब घर घर जाकर लेगा और वापस करेगा। साबुन/सर्फ, कोयला/बिजली का बिल का पैसा कहां से लाएगा?

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