जम्मू-कश्मीर में 6 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर में 6 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। इन लोगों को आतंकवादी संगठनों से ताल्लुक रखने और उनके लिए ओवरग्राउंड वर्कर्स के दौर पर काम करने के आरोप में कार्रवाई की गई है। सरकार की ओर जिन 6 कर्मचारियों के खिलाफ ऐक्शन लिया गया है, उनमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के दो सिपाही भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश की सरकार की ओर से एक कमिटी का गठन किया गया था, जिसकी सिफारिश पर यह ऐक्शन लिया गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत ऐसे मामलों की स्क्रूटनी के लिए कमिटी का गठन किया था।

इससे पहले बीते सप्ताह जम्मू कश्मीर के प्रशासन ने कहा था कि किसी भी कर्मचारी को तभी पासपोर्ट जारी किया जाएगा, जब उनके विभाग की ओर से विजिलेंस क्लियरेंस दी जाए। इससे पहले भी इसी साल जुलाई में सरकार ने अपने 11 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया था। इनमें हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सैयद सलाहुद्दीन के बेटे भी शामिल थे। इसके अलावा पुलिस विभाग से भी दो लोगों को नौकरी से हटाया गया था। इन लोगों पर आरोप था कि ये आतंकी संगठनों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर काम कर रहे थे।

In Jammu and Kashmir, 6 government employees have been removed from their jobs. Action has been taken on the allegation of these people having links with terrorist organizations and working for them in the era of overground workers. Among the 6 employees against whom action has been taken by the government, two soldiers of Jammu and Kashmir Police are also included. According to reports, a committee was constituted by the government of the Union Territory, on whose recommendation this action has been taken. Under Article 311(2)(c) of the Indian Constitution, a committee was constituted to investigate such matters.

Earlier last week, the Jammu and Kashmir administration had said that a passport would be issued to any employee only after vigilance clearance is given by his department. Earlier also in July this year, the government had fired 11 of its employees. These included the son of Hizbul Mujahideen commander Syed Salahuddin. Apart from this, two people were also removed from the police department. These people were accused that they were working as overground workers for terrorist organizations.

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