मार्निंग वॉक पर निकले जज की टैम्पो से कुचलकर हत्या , हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेकर डीजीपी/एसएसपी को किया तलब

मॉर्निंग वॉक पर निकले धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। न्यायाधीश उत्तम आनंद ने छह माह पूर्व ही धनबाद में ज्वाइन किया था । जानकारी के अनुसार रोजाना की तरह सुबह 5 बजे करीब न्यायाधीश मॉर्निंग वॉक करने अपने आवास से गोल्फ ग्रांउड जा रहे थे, उसी क्रम में रणधीर वर्मा चौक के निकट न्यू जजेज कॉलोनी मोड पर उल्टी दिशा से आ रहे चार पहिया वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी दी। न्यायाधीश आनंद उसी वक्त सड़क किनारे गिर गए। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर जिले के तमाम न्यायिक पदाधिकारी अस्पताल पहुंच गए। इस दुर्घटना से पूरे इलाके में खौफ का माहौल बन गया है।

जिले के पुलिस कप्तान ने मामले पर संज्ञान लेकर बयान दिया और कहा कि इस मामले में हर एंगल से जांच की जा रही है।

अभी तक इस घटना को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब यह बात साफ हो गई है कि यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। मिली जानकारी के अनुसार, न्यायाधीश उत्तम आनंद रंजय सिंह की हत्या मामले की सुनवाई कर रहे थे। रजंय सिंह धनबाद के नेता और झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह का करीबी था।

मामले में ऑटो चालक समेत 3 लोग गिरफ्तार : इधर घनबाद से सटे गिरिडीह पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में ऑटो चालक और उसके दो सहयोगीयों को गिरिडीह से गिरफ्तार कर ऑटो को जब्त कर लिया ।

जज की मौत का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट :- जज की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने शीर्ष अदालत के समक्ष मामले को रखा और सीबीआई जांच की मांग की है । उधर झारखंड हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी व धनबाद के एसएसपी को तलब कर सुनवाई शुरू कर दी है। देश के मुख्य न्यायाधीश ने भी जज उत्तम आनंद की हत्या के सनसनीखेज मामले में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से बात की है।

न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल- दुर्घटना या वारदात?

न्यायाधीश, जिसे आम लोगों के साथ न्याय करने का अधिकार दिया जाता है। ताकि समाज का कोई भी वर्ग पीड़ित न हो और उनके साथ न्याय हो सके। यह घटना न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर समाज को न्याय दिलाने वाला वर्ग सुरक्षित ही नहीं है, तो उससे न्यायोचित कार्यों की उम्मीद कैसे की जा सकती है। हालांकि अब ये बात साफ हो गई है कि ये एक हत्या है।

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