कर्म, ध्यान और भक्ति मार्ग से ही जीव का कल्याण संभव: गुप्तेश्वर पांडे

वृंदावन: बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने रविवार को श्रीमद्भागवत के माहात्म्य पर चर्चा करते हुए कहा कि यह वेदों का सार है। ये भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय विग्रह भी है। जीव के कल्याण के लिए वेदों ने तीन मार्ग बताए हैं। कर्म, ध्यान और भक्ति मार्ग। सारे मार्गों के कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं। भक्ति मार्ग में सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है श्रीमद्भागवत।

चैतन्य विहार फेस दो स्थित पाराशर अध्यात्म ट्रस्ट में जीवन की पहली भागवत कथा में पांडे ने कहा, ज्ञानमार्ग में सबसे अधिक काम व्यासजी ने किया है। पथिक मार्ग नारद भक्ति दर्शन में है, जिसमें केवल भक्ति का निरूपण है, इसकी रचना से पहले भक्ति दर्शन पर कई ग्रंथ लिखे गए। नारद दर्शन में 84 सूत्र जो लिखे, उसमें भक्ति का निरूपण किया गया है। इससे असंतुष्ट व्यासजी ने भक्ति शास्त्र की रचना की, उसी का नाम है श्रीमद्भागवत पुराण। पांडे ने कहा, सिद्धों को भी शंकाएं होती हैं, शास्त्रों में इसके अनेक उदाहरण हैं। कुरुक्षेत्र में जब अर्जुन को शंका हुई तो भगवान श्रीकृष्ण को गीता का उपदेश देना पड़ा। साधक की शंका निवारण को भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से गीता का जन्म हुआ। गीता के ज्ञान से श्रद्धा और विश्वास का उदय होता है। उन्होने कहा, कथा श्रवण करने वाले को पूर्ण चित्त की शुद्धि कर लेनी चाहिए। तभी कथा के श्रवण का महत्व श्रोता समझ सकता है।

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