“लॉक डाउन एक सुनहरा अवसर” ब्रह्माकुमारी कोमल,  अंबाला कैंट,

“लॉक डाउन एक सुनहरा अवसर” ब्रह्माकुमारी कोमल, अंबाला कैंट,

: एचएनआर : अंबाला, अंग्रेजी में कहावत है there is only one thing certain that is uncertainty. अनिश्चितता के अलावा इस संसार में कुछ भी निश्चित नहीं । लेकिन इस अनिश्चितता में व्यक्ति किस प्रकार उसका सामना करता है यह दर्शाता है कि हम कितने सुदृढ़ हैं ,हमारी मानसिक शक्ति कितनी हैं।
कोरोना वायरस एक ऐसी महामारी है जिसने पूरे विश्व को एक साथ प्रभावित किया है । कोई प्राकृतिक आपदा ,युद्ध या आतंकी हमला केवल उसी स्थान को प्रभावित करता है लेकिन इस महामारी ने संपूर्ण विश्व के मानव जाति के मानस पटल पर बहुत गहरा असर किया है । अनजान कोरोना वायरस ने सबको हिला कर रख दिया है। universe has shaken us only to awaken us. यह परिस्थिति हमें जागृत करने के लिए आई है।
डर का मानव जीवन पर असर:-
कोरोनावायरस से बचाव के लिए पूरे भारत में 25 मार्च को लॉक डाउन किया गया जिसके चलते जो जिस स्थान पर थे वहीं रहने को मजबूर हो गए। देश का संपूर्ण कारोबार बंद हो गया ।मानव जीवन ठहर सा गया। लोगो का आपसी मेल मिलाप खत्म हो गया। अचानक आए इस बदलाव ने मनुष्यों के मन मे चिंता ,दुख ,परेशानी व डर की लहर पैदा कर दी। इस डर की वजह से कई व्यक्ति डिप्रेशन में चले गए व कुछ बीमारी से ग्रसित लोगों ने डर की वजह से अपने जीवन को खत्म कर लिया ।महामारी से भी ज्यादा मनुष्य के जीवन पर डर के कारण ज्यादा असर हो रहा है ।
कहानी प्राचीन समय में कोई बीमारी आती थी तो कुछ साधु शहर की रक्षा के लिए शहर की सीमाओं पर खड़े होते थे। बीमारी को आने से पहले पूछते थे कि तुम कितने लोगों को ले जाओगे ।अक्सर बीमारी अकेली नहीं आती है, वह अपने साथ 2 साथी दुख व भय को भी लेकर आती है ,बीमारी कहती मैं इतने लोगों को ले जाऊंगी , दुख कहता कि मैं बीमारी जितनो को ले जाएगी उससे आधे ले जाऊंगा और भय ने कहा मैं किसी को नहीं लेकर जाऊंगा ।साधु ने तीनों को जाने दिया ।धीरे धीरे बीमारी सब जगह फैल गई और जब जाने लगी तब साधु ने देखा कि जिसने जितने कहे थे उससे उतने ही लोग खत्म हुए थे लेकिन भय से सबसे ज्यादा खत्म हुए थे तो उससे पूछा कि तुमने तो कहा था कि किसी को नहीं ले जाओगे तो भय ने जवाब दिया कि मैं किसी को नहीं ले जा रहा हूं, यह खुद ही मेरे साथ चल रहे हैं ।आज भी ऐसा बीमारी के साथ डर का माहौल बनता जा रहा है।
यह महामारी और लॉकडाउन हमारी आंतरिक शक्ति को जागृत करने के लिए व जीवन में जो चीजें महत्वपूर्ण हैं जिनसे हमारा ध्यान भटका हुआ है उस पर ध्यान केंद्रित कराने के लिए आई हैं। “lockdown is for look in”
लॉकडाउन कुछ नया करने का अवसर :- इंग्लैंड में रहने वाले मशहूर आइसेक न्यूटन जब कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, उन्हें लग रहा था कि जो पढ़ाई वो कर रहे हैं, वो बहुत आउट-डेटड है| वो सोचते थे कि कुछ नया कान्सेप्ट आना चाहिए, कुछ नए रिसर्चसेज होने चाहिए, कुछ नया और हट के होना चाहिए| उन्हें उस कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए चार साल हो गये, लेकिन उन्हें कुछ अलग करने का समय नहीं मिल रहा था| इसके बाद सन् 1665 में ब्यूबोनिक नाम की एक महामारी आई| इस समय जो हालात है, वहीं हालात हो गए थे| हर जगह अभी की तरह लॉक डाउन हो गया था| जब हर जगह लॉक डाउन हो गया था, तो सभी अपने-अपने घरों में ही बैठे रहते थे| आइसेक घर में बैठकर उन बातों को सोच रहे थे, जिन्हें सोचने के लिए उन्हें समय नहीं मिलता था| वह घर में आराम से बैठकर सोच रहे थे, क्योंकि अभी उनके पास समय ही समय था| जब वह सेल्फ आइसोलेशन में थे, तो वह एक दिन अपने गार्डन में घूमने निकले, तब उन्होंने गार्डन में एक पेड़ से सेब का फल गिरते देखा| उन्होंने बहुत गंभीर रूप से उस सेब को गिरते हुए देखा और फिर उस नकारात्मक से माहौल में सकारात्मकता दिखाकर, उन्होंने दुनिया को “Universal Law of gravity( गुरुत्वाकर्षण का नियम) दिया। जब उस समय पूरी दुनिया में नकारात्मकता फैली हुई थी| तो आइसेक न्यूटन अपने अन्दर सकारात्मकता लेकर बढ़ रहे थे, कुछ अलग सोच रहे थे, कुछ अलग करना चाह रहे थे|
हम भी जिंदगी में कुछ नया कमाल कर सकते हैं, उसके लिए जरूरी है कि हम अपने आप को एनेलाइज करें|
इस लॉकडाउन में खुद को सकारात्मक रखने के लिए क्या करें व क्या ना करें:-
1.समय बदलता रहता है ।कुछ भी सदा काल के लिए नही रहता। कब तक खत्म होगा,क्या होगा ,कितना समय और बढ़ेगा ये सरकार की सोच का विषय है। हम ये सोचे कि ये बीमारी या लॉकडाउन भी कुछ समय के लिए आया है,जल्दी ही बीत जाएगा। जो हमारे नियंत्रण में हैं उसके बारे में सोचें। सब अच्छा होगा । यह सोचे कि हमारे पास बिजली, पानी ,इंटरनेट वा राशन आदि सब कुछ है और हम अपने घर सुरक्षित हैं ,वह लोग जो बाहर देश सेवा में हैं ,असुरक्षा के माहौल में हैं उनका शुक्रिया करें।
2. इस समय जब चारों और नकारात्मकता का माहौल है ।नकारात्मक लोगो व समाचारों से दूर रहे।सकारात्मक लोगो से ही फोन पर बात करे। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ नेगेटिव थॉट से भी दूरी बनाकर रखनी है। हाथों को धोने के साथ-साथ मन को भी साफ रखना है।
3.अच्छी व प्रेरणादायी किताबें पढ़कर खुद को प्रोत्साहित करने के लिए समय मिला है। पॉजिटिव रहकर पॉजिटिविटी फैलाएं जिससे दूसरे के चेहरे पर भी खुशी ला सकें ।
4. अकेलेपन में बोर होने की बजाय हम खुद के बेस्ट फ्रेंड बन जाये।अपने अंदर जाकर खुद से बातें करेंगे तो खुशी महसूस होगी। “lockdown is for look inward”।
5. खाली दिमाग शैतान का घर, इसलिए अपने को किसी न किसी कार्य में बिजी रखें । साफ सफाई ,बच्चों के साथ खेलना ,पेंटिंग,गीत गाना या खाना बनाने आदि किसी भी तरीके से अपना मनोरंजन कर खुद को बिजी रखें। यह सोचे अभी अपनी कला ,विशेषताओं ,हॉबीज को आगे बढ़ाने का बहुत सुंदर अवसर मिला है. कुछ नया सीखने को नहीं मिल रहा है तो आप अपने घर में बैठे-बैठे इन्टरनेट के माध्यम से कुछ नया सीख सकते हैं|
6.जो कंपनियों में या कोई और जॉब करते हैं , वह लोग सोचते हैं कि मुझे अपने लिए कुछ अलग करने का परिवार के साथ बैठने का समय नहीं मिल रहा है,अभी लॉकडाउन में बच्चों के साथ साथ उन्हें भी वेकेशन का मौका मिला है। अभी घर में बैठे हुए कुछ सोच सकते हैं और कुछ अलग कर सकते हैं| बच्चों व परिवार के साथ समय बिता सकते हैं, उन्हें समझ सकते हैं, उनकी देखभाल कर सकते है।
7.हर समस्या के दो पहलू होते हैं ,सकारात्मक व नकारात्मक ।इस लोक डाउन में भी बहुत कुछ सकारात्मक हुआ है जैसे कि वायु व ध्वनि प्रदूषण कम होना ,स्वच्छता के प्रति जागरूकता होना ,नदियों का पानी साफ होना, प्रकृति का हरा भरा होना ,ओजोन लेयर का छेद भरना ,अपराधिक केस व एक्सीडेंट से मृत्यु ना के बराबर होना आदि। सबको अपना घर का काम खुद करने की आदत हुई है ,देश के सभी वर्ग चाहे किसी भी धर्म ,मजहब व पार्टी से हो सब इस समस्या के समय एकजुट हो गए हैं।
8.अभी समय है मेडिटेशन (राजयोग) द्वारा परमात्मा से जुड़कर अपने अंदर खोई हुई शक्तियों को जागृत कर खुद को आंतरिक रूप से सशक्त बनाने का।शारीरिक इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ अपने मन को भी नेगेटिविटी से बचाने के लिए इम्यूनिटी बढ़ानी होगी तभी हम इस बीमारी पर जीत पा सकते हैं व खुद को तनावग्रस्त होने से बचा सकते हैं।ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्रों द्वारा इसके लिए फ्री ऑनलाइन मेडिटेशन कोर्स यूट्यूब व वेबीनार द्वारा सब इच्छुक भाई बहनों को सिखाया जा रहा है। संस्था से जुड़े हुए भाई बहनों को भी घर बैठे वरिष्ठ राजयोगी तपस्वीओं द्वारा प्रेरणादाई उत्साहवर्धक क्लासेस समय प्रति समय दी जा रही हैं जिससे सभी में उमंग उत्साह व खुशी बनी रहे ।
“लोकडाउन में खुद को सशक्त बनाना है
कोरोना वा नेगेटिविटी को दूर भगाना है”

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