योगी सरकार ने सत्रह जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने सम्बन्धी अध्यादेश निरस्त किया था -रामबिलास प्रजापति

योगी सरकार ने सत्रह जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने सम्बन्धी अध्यादेश निरस्त किया था -रामबिलास प्रजापति

 

देवरिया । अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ उत्तर प्रदेश पूर्वी जोन के अध्यक्ष रामबिलास प्रजापति ने कहा कि योगी सरकार ने सत्रह अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने सम्बन्धी अपने ही अध्यादेश को निरस्त कर इन्हें इनके अधिकार से बंचित कर दिया और कथित तौर पर अपनी संस्तुति केन्द्र सरकार को भेजा। [banner caption_position=”bottom” theme=”default_style” height=”auto” width=”100_percent” group=”jalandhar-hospitals” count=”9″ transition=”fade” timer=”4000″ auto_height=”0″ show_caption=”1″ show_cta_button=”1″ use_image_tag=”1″]
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति की सूची में मझवार, गोंड बेलदार, तुरैहा , शिल्पकार पासी तरमाली दर्ज है किन्तु उनकी पर्यायवाची उपजातियों कहार,केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हांर, प्रजापति,धीवर,विन्द,भर,राजभर को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है जबकि ये जातियां अनुसूचित जाति की सूची में दर्ज जातियों के समकक्ष है। मुलायम सिंह यादव ने १०अक्टूबर २००५ को इन जातियों को अनुसूचित जाति की सुविधा देने सम्बंधी अध्यादेश जारी किया और प्रमाण पत्र जारी भी हुआ, नौकरियां भी मिलने लगी किन्तु बसपा द्वारा उच्च न्यायालय में मुकदमा कराकर स्थगन आदेश करा दिया गया तथा बसपा की सरकार बनते ही अपने प्रथम कैबिनेट की बैठक में ही मुलायम सिंह यादव की सरकार द्वारा जारी अध्यादेश को निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि १५ फरवरी २०१३ को पुनः सपा की सरकार ने अपनी संस्तुति भेजी ,उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी और उसे आर जी आई ने खारिज कर दिया।एक अप्रैल २०१५ को पुनः सत्रह जातियों को परिभाषित कर अपनी अठारह सूत्रीय आख्या के साथ अपनी संस्तुति सपा सरकार ने भेजा तथा २२दिसम्बर २०१६ को इस संदर्भ में अध्यादेश भी जारी कर दिया किन्तु बसपा ने पुनः २४ जनवरी को स्थगन करा दिया।एक याचिका के तहत उच्च न्यायालय ने योगी सरकार को एक नोटिस जारी कर यह जानना चाहा कि किस आधार पर इन्हें प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है  [banner caption_position=”bottom” theme=”default_style” height=”auto” width=”100_percent” group=”ramakrishna-hospital-kota” count=”9″ transition=”fade” timer=”4000″ auto_height=”0″ show_caption=”1″ show_cta_button=”1″ use_image_tag=”1″]  अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा।इस नोटिस के तारतम्य में योगी सरकार ने आनन फानन में सत्रह जातियों को २४ जून २०१९ कोअनुसूचित जाति की सूची में शामिल कर लिया और शासनादेश भी जारी कर दिया तथा मौखिक तौर पर जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाय। उन्होंने कहा कि चूंकि सरकार की मंशा सही नहीं थी इसलिए भाजपा समर्थक गोरखप्रसाद नामक ब्यक्ति से न्यायालय में आर्टिकल ३४१ के उल्लंघन का आरोप लगाकर मुकदमा कराकर स्थगन कराया गया तथा इसी का हवाला देकर योगी सरकार ने पूर्व की सरकारों सहित स्वयं के द्वारा जारी अध्यादेशों को निरस्त कर दिया। इस प्रकार इन जातियों को अधिकार बंचित कर दिया गया ।
प्रजापति ने प्रदेश व केन्द्र सरकारों का ध्यान आकृष्ट करते हुए शीघ्र इनसत्रह जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की है ।

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