इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश आयु निर्धारण के लिए हाई स्कूल प्रमाण पत्र ही मान्य

*इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, आयु निर्धारण के लिए हाईस्कूल प्रमाणपत्र ही मान्य*

 

*उत्तर प्रदेश प्रयागराज से सतीश चंद्र की रिपोर्ट*

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि आयु निर्धारण के लिए हाईस्कूल प्रमाणपत्र ही मान्य है,[banner caption_position=”bottom” theme=”default_style” height=”auto” width=”100_percent” group=”ramakrishna-hospital-kota” count=”-1″ transition=”fade” timer=”4000″ auto_height=”0″ show_caption=”1″ show_cta_button=”1″ use_image_tag=”1″] बशर्ते वह फर्जी न हो। कोर्ट ने कहा कि हाईस्कूल प्रमाणपत्र पर अविश्वास कर मेडिकल जांच रिपोर्ट पर आयु निर्धारण करना ग़लत व मनमानापूर्ण है। इसी के साथ कोर्ट ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र की अनदेखी कर आपराधिक घटना के समय याची को बालिग ठहराने के किशोर न्याय बोर्ड कानपुर नगर व अधीनस्थ अदालत के आदेशों को रद्द कर दिया है। साथ ही प्रमाणपत्र के आधार पर याची को घटना के समय नाबालिग घोषित किया है।[banner caption_position=”bottom” theme=”default_style” height=”auto” width=”100_percent” group=”nnt-join” count=”-1″ transition=”fade” timer=”4000″ auto_height=”0″ show_caption=”1″ show_cta_button=”1″ use_image_tag=”1″] कोर्ट ने कहा कि बोर्ड ने 2007 की किशोर न्याय नियमावली की प्रक्रिया का पालन नहीं किया और मनमानी की है।

 

यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने मेहराज शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची व सह अभियुक्तों के खिलाफ हत्या व अपहरण के आरोप में चार्जशीट दाखिल है।[banner caption_position=”bottom” theme=”default_style” height=”auto” width=”100_percent” group=”jalandhar-hospitals” count=”-1″ transition=”fade” timer=”4000″ auto_height=”0″ show_caption=”1″ show_cta_button=”1″ use_image_tag=”1″] याची ने कोर्ट में अर्जी दी कि उसे नाबालिग घोषित किया जाए क्योंकि घटना 23 दिसंबर 2013 की है और तब वह नाबालिग था। कोर्ट ने कहा एसीजेएम को आयु निर्धारण करने का अधिकार नहीं है।

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