पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति । तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः

भारतीय संस्कृति में प्रकृति सेवा एवं पर्यावरण रक्षा की दृष्टि से वृक्षारोपण का अहम स्थान है। वृक्षारोपण का मूल स्रोत वेद, स्मृति, पुराण, धर्मशास्त्र तथा आयुर्वेद आदि हैं। कोई भी ऐसा वृक्ष नहीं, जिसका उपयोग आयुर्वेद में वर्णित न हो। कोई भी पुराण वृक्ष-महिमा में तंग हृदय प्रतीत नहीं होता। वृक्ष हर जीव के लिए उपकारी, सेवा-धर्म के प्रेरक, दैवीय शक्ति से संपन्न और सर्वपूज्य हैं। भारतीय संस्कृति की सर्वप्रथम प्रस्तुति ऋग्वेद हैं, जिसमें किसी भी मंगल-कार्य के समय वृक्षों के कोमल पत्तों का स्मरण किया गया।

उक्त विचार आज सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय,मे कुलाधिपति महोदया एवं प्रदेश सरकार के वृक्षारोपण जनव्यापी अभियान केअन्तर्गत वाराणसी के कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी के नेतृत्व में वैदिक मंत्रो के बीच क्रीड़ा मैदान के उत्तरी किनारे पर आज पूर्वांह 11:00 बजे विश्वविद्यालय परिवार के साथ 500 वृक्षों का वृहद रोपड़ अभियान चलाकर किया गया।

उस दौरान कुलपति प्रो त्रिपाठी ने कहा कि यह प्रांगण और यहाँ का परिवेश शास्त्र परक और भारतीय संस्कृति एवं ऋषि परम्परा का संगम है जिसके प्रवाह में पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का धर्म है।

*पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति । तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः ॥*

जो कोई भी भक्त मेरे लिए पत्र, पुष्प, फल, जल आदि भक्ति से अर्पण करता है, उस शुद्ध मन के भक्त का वह भक्तिपूर्वक अर्पण किया हुआ (पत्र पुष्पादि) मैं भोगता हूँ अर्थात् स्वीकार करता हूँ।।उन्हे शुद्ध पर्यावरण प्राप्त होता है।

*कुलपति प्रो हरेराम ने कहा कि*

पीपल की महिमा भी गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि “मैं वृक्षों में पीपल हूं।” पीपल के जड़ में ब्रह्मा जी, बीच में भगवान विष्णु और सबसे ऊपरी भाग में शिव का वास होता है। वहीं स्कंदपुराण के अनुसार पीपल के जड़ में विष्णु, बीच में श्रीकृष्ण, डालियों में भगवान विष्णु और फलों में सभी देवताओं का पीपल निवास होता है।

कुलपति प्रो त्रिपाठी ने कहा कि

ब्रह्मवैवर्त पुराण में लिखा है कि पीपल का वृक्ष लगाने वाला हजारों वर्ष तक तपोलोक में निवास करता है। सब वृक्षों में पीपल श्रेष्ठ हैं क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में स्वयं अपने श्रीमुख से उसको अपना रूप बताया है। अत: पीपल के वृृक्ष का पूजन और पीपल वृक्ष का आरोपण अनंत पुण्यदायी है।

 

*शपथ लें’ इस महा अभियान का हिस्सा बन–*

आज हम लोग सभी जन मिलकर इस राष्ट्र व्यापी जन अन्दोलन में सक्रिय भूमिका अदा कर महाअभियान का हिस्सा बने हम लोग शपथ ले–

आज से प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के प्रत्येक वर्ष एक-एक वृक्ष लगाकर उम्र भर रोपित करेंगे तो शास्त्र विधान से पूण्य के भागीदार होंगे उसी से हमारे पर्यावरण को भी एक नया आयाम मिलेगा।

वर्तमान मे चल रहे कोरोना महामारी मे ओक्सिजन की कमी से हमारे अपने लोगों को खोना पड़ा।यदि हम पहले से सजग रहकर समुचित वृक्षारोपण कर पर्यावरण का संरक्षण देते तो आज हम सुरक्षित रहते।शपथ लें की आज से घर के एक एक सदस्य के नाम से प्रत्यके वर्ष वृक्षारोपण करे इससे पर्यावरण की रक्षा होगी साथ भारतीय संस्कृति के धर्म की रक्षा होगी।

*उपस्थिती–*

उक्त अवसर पर कुलसचिव ओमप्रकाश,प्रो रामकिशोर त्रिपाठी,प्रो रामपूजन पान्डेय,प्रो हरिशंकर पान्डेय,प्रो प्रेम नारायण सिंह,प्रो सुधाकर मिश्र,प्रो महेंद्र पान्डेय,प्रो जितेन्द्र कुमार,प्रो राजनाथ,प्रो हीरककान्ति,प्रो अमित शुक्ल,,प्रो ब्रजभूषण ओझा,डॉ पद्माकर मिश्र, डॉ विजय पान्डेय,प्रो शैलेश मिश्र,प्रो हरिप्रसाद अधिकारी,प्रो हिरक कान्ति चक्रवर्ती,क्रीड़ा प्राध्यापक लालजी मिश्र,सिस्टम मैनेजर विजय मणि त्रिपाठी,उपकुलसचिव केश लाल,सहायक कुलसचिव चन्द्र नाथ,सहायक कुलसचिव लेख सुनिल यादव, अधीक्षक प्रशासन पं सुनिल कुमार चौधरी,उद्यान अधीक्षक मनीष चौबे,सुनिल तिवारी,यदुनाथ त्रिपाठी,काशीनाथ पटेल एवं छात्र आदि उपस्थित थे।

अजय कुमार उपाध्याय

रिपोर्टर

वाराणसी

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