सीतापुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव यहां जनपद में रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है

सीतापुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव यहां जनपद में रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है।इस पद पर कबिज होने के लिए भाजपा से श्रद्धा सागर गुप्ता ,सपा से अनीता राजवंशी सहित दो अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं।भाजपा और सपा की आमने सामने टक्कर होनी तय मानी जा रही है। भाजपा पक्ष से जहा पर सत्ता की मशीनरी लगी हुई है वही सपा की कमान सपा एम एल सी आनन्द भदौरिया सम्हाले हुए हैं।गुटीय राजनीति चाहे भाजपा हो या सपा, दोनों में जबर्दस्त तरीके से हावी है वैसे तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव सत्ता पक्षीय ही माना जाता है। भारतीय जनता पार्टी भले ही सत्ता में है लेकिन मौजूदा समय में वह जनप्रतिनिधियों मे आपसी तालमेल न होने के साथ ही पार्टी में अवसरवादी नेताओं की घुसपैठ के चलते अंदर ही अंदर चल रही र्खींचतान से जूझ रही है। जिसकी वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर खतरा मंडरा सकता है क्योंकि नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य सबसे ज्यादा निर्दलीय हैं और उसके बाद भाजपा पार्टी के फिर नम्बर आता है, समाजवादी पार्टी का, सबसे कम सदस्य है बहुजन समाज पार्टी के, जिला सीतापुर में कुल 79 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं।जिनकी तरफ दलीयऔर निर्दलीय प्रत्याशी निगाहें जमाये हुए हैं। रही बात सरकारी मशीनरी की तो वह जनप्रतिनिधियों को किसी भी प्रकार से तवज्जो नहीं दे रही हैजिसपर अवसरवादी नेताओं के इशारों पर ही कार्य करने केआरोप नेताओ द्वारा लगाए जा रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सारा दारोमदार निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों के ऊपर ही निर्भर होगा। ऐसी परिस्थितियों में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सत्ता पक्ष के हाथों से खिसकने की भी संभावनाएं बनी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन होगा काबिज । या अवसरवादी नेताओं की आपसी साठ गांठ से कही विपक्ष इस महत्वपूर्ण सीट को अपने कब्जे में न करले परिणाम क्या होगा यह बात तो 3 जुलाई को होने वाले चुनाव में जिला पंचायत सदस्यों के वोटों पर ही निर्भर करेगी।

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