2-6 साल के बच्चों पर कोवैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया गया

2-6 साल के बच्चों पर कोवैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया गया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पहली बार 2-6 साल के बच्चों पर कोवैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया गया। स्क्रीनिंग में सफल रहे पांच बच्चों को पहली डोज दी गई। सबसे छोटी बच्ची 3 साल की है। दो बच्चे कानपुर के तथा तीन कानपुर देहात के हैं। इनमें एक डॉक्टर की बेटी, एक बैंक मैनेजर का बेटा तथा तीन कारोबारियों के बच्चे शामिल हैं।

प्रखर हॉस्पिटल में 6-12 और 12-18 साल के 40 बच्चों के बाद 2-6 साल के 6 बच्चों की दो दिन में स्क्रीनिंग की गई थी। बुधवार सुबह भारत बायोटेक और आईसीएमआर की हरी झंडी के बाद 5 बच्चों को माता-पिता संग सेंटर पर बुलाया गया। ट्रायल टीम के चीफ गाइड और पूर्व डीजीएमई डॉ. वीएन त्रिपाठी और गाइड डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि पूरे दिन में सभी औपचारिकताओं और काउंसिलिंग के बाद पांच बच्चों को कोवैक्सीन की डोज दी गई है। देश में कानपुर में ही पहली बार 2-6 के बच्चों पर पहला ट्रायल किया गया है।

ट्रायल टीम के चीफ गाइड डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सभी बच्चों पर टीम के सदस्य 7 दिन तक निगरानी रखेंगे। सभी की सुबह-शाम की रिपोर्ट आईसीएमआर को भेजी जाएगी। शाम को डिस्चार्ज कर दिया गया। सभी को दूसरी डोज 28 दिन पर लगेगी। इन बच्चों की रिपोर्ट आईसीएमआर और भारत बायोटेक को भेजी जा रही है। इस उम्र के ग्रुप में भी 20 बच्चों को कोवैक्सीन का ट्रायल किया जाना है।
झारखंड में एक जुलाई तक के लिए पाबंदियां और छूट :

-सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, थियेटर, असेंबली हॉल, बैंक्वेट हॉल, क्लब, बार बंद रहेंगे
-रेस्तरां केवल होम डिलिवरी और टेक होम सुविधा के लिए खुलेंगे। मेजबानी नहीं होगी
-होटल के अंदर बैंक्वेट हॉल में भी बैठाकर भोजन कराने पर प्रतिबंध
-सभी सरकारी एवं निजी कार्यालय 50 प्रतिशत मानव संसाधन के साथ शाम चार बजे तक खुल सकेंगे
-माल वाहनों का परिवहन निर्बाध रूप से चलता रहेगा
-धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे
– 5 व्यक्ति से अधिक के इकठ्ठा होने पर प्रतिबंध रहेगा। शाम पांच से सुबह छह बजे के दौरान अनुमन्य गतिविधियों से संबंधित लोगों, अंतिम यात्रा में जाने वालों, रेल-हवाई यात्रियों और कोविड ड्यूटी से जुड़े लोग आवागमन कर सकेंगे।
– शादी घर या कोर्ट में ही अधिकतम 11 व्यक्तियों की मौजूदगी में होगी। शादी सार्वजनिक स्थान, बैंक्वेट-कम्युनिटी हॉल में नहीं होगी। लाउडस्पीकर, पटाखा की अनुमति नहीं। विवाह की तीन दिन पूर्व सूचना नजदीकी थाने में देनी होगी।
-अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे।
– जुलूस पर रोक जारी रहेगी
– समस्त शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन क्लास हो सकते हैं
-आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे पर लाभुकों को घर पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी
-राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकार की ओर से होने वाली परीक्षायें स्थगित रहेंगी
– मेला और प्रदर्शनी पर रोक जारी रहेगी
-स्टेडियम, जिम, स्विमिंग पूल और पार्क बंद रहेंगे
-शहर और गांवों में सामाजिक दूरी का पालन करने पर ही लगेंगे हाट-बाजार
– बस परिवहन पर रोक जारी रहेगी। जिला प्रशासन, खनन और औद्योगिक कर्मियों के उपयोग वाली बसों को छूट
-सार्वजानिक स्थान पर मास्क पहनना और सामजिक दूरी बनाए रखना अनिवार्य है
-सरकार के आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है

औरंगाबाद नगर थाना क्षेत्र में कालीबाड़ी मंदिर के बाबा पर कथित रूप से सपने में यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया।
बुधवार को जब महिला ने यह आरोप नगर थाना में पुलिस अधिकारियों के सामने लगाए तो सब लोग हैरत में पड़ गए। इतना ही नहीं महिला ने हंगामा करना शुरू कर दिया जिसके बाद आरोपित बाबा को पूछताछ करने के लिए नगर थाना में लाया गया। हालांकि उन्होंने महिला को पहचानने से भी इंकार कर दिया।

महिला ने एक आवेदन नगर थाने में दिया है। महिला ने कहा है कि उसके बेटे की तबीयत काफी खराब थी जिसके बाद झाड़-फूंक के लिए वह बाबा के संपर्क में आई। 15 दिनों की पूजा के बारे में उसे बताया गया और उसे घर भेज दिया गया। इसके बाद सपने में आकर यौन शोषण करने का प्रयास बाबा करने लगे। महिला ने कहा कि बाद में उसके बेटे की मौत हो गई। उसने बाबा की इस हरकत का विरोध किया तो दूसरे बेटे को भी झाड़ फूंक कर मार देने की धमकी दी गई। इसके बाद महिला नगर थाना पुलिस पहुंची और उन्हें इसकी जानकारी दी।

पुलिस अधिकारी महिला की बातों को सुनने के बाद पूछताछ के लिए उन्हें लेकर आ गए। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है और वह महिला को पहचानते भी नहीं हैं। वह पिछले 19 सालों से यहां रह रहे हैं और मूल रूप से गया जिले के रहने वाले हैं। इधर मुहल्ले के लोगों ने भी इस तरह के आरोपों का खंडन किया और कहा कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। जिन पर आरोप लगाया जा रहा है, वह कभी भी गलत कार्यों में लिप्त नहीं रहे हैं और किसी के कहने पर इस तरह की हरकत की जा रही है।

भागलपुर में पहली बार काला अमरूद का उत्पादन हुआ है।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में दो साल पहले अमरूद का पौधा लगाया गया था। उसमें फलन अब शुरू हो गया है। एक-एक पौधे में चार से पांच किलो का फलन हुआ है। एक अमरूद औसतन सौ-सौ ग्राम के आसपास का है। बीएयू अब इस शोध में जुट गया है कि कैसे इस पौधे को आम किसान उपयोग में लाए। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी तक देश में इस अमरूद का कमर्शियल उपयोग नहीं हो रहा है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान (शोध) के सह निदेशक डॉ. फिजा अहमद ने बताया कि बीएयू में पहली बार इसका फलन शुरू हुआ है। यहां की मिट्टी व वातावरण इस फल के लिए उपयुक्त है। दो साल में यह फल देने लगता है। अब इसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है, ताकि यह बाजार में बिक सके। उन्होंने बताया कि भविष्य में हरे अमरूद की तुलना में इसका कर्मिशयल वैल्यू 10 से 20 प्रतिशत अधिक होगा। आमतौर पर अमरूद 30 रुपये से 60 रुपये किलो तक बिकता है।

सह निदेशक ने बताया कि काला अमरूद में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है जो बुढ़ापा आने से रोकता है। इसे खाने से लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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