25 प्रतिशत ही हो रही है फूल की खपत,अपने ग्राहकों के लिए तरश रहे है सुंदर फूल

25 प्रतिशत ही हो रही है फूल की खपत,अपने ग्राहकों के लिए तरश रहे है सुंदर फूल

फूल बाजार की फाइल तश्वीर

*बाजार में आने के बाद बचे फूल कचरे में फेंक दे रहे है किसान
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कोलकाता:फूल जिनकी खुशबू से पूरा माहौल सुगन्धों से ओतप्रोत हो जाता है। फूल जो कभी मंदिर में भगवान की मूर्ति पर चढ़ाए जाते हैं तो कभी दरगाह और कभी शादी–ब्याह में जिनसे सजावट की जाती है, ये फूल अब अपने ग्राहकों के लिए भी तरस रहे हैं। फूल किसानों के अरमान अब मुरझा गए हैं। लगातार दूसरे वर्ष कोरोना और लॉक डाउन के कारण बंगाल में फूल की खेती करने वाले लाखों किसानों को बड़ा घाटा हुआ है। एशिया का सबसे बड़ा रविंदसेतु के नीचे स्थित कोलकाता का फूल बाजार में अब बस 25 प्रतिशत पर ही खरीद बिक्री हो रही है वो भी सुबह के वक्त बाकी पूरे दिन मार्केट में फूल की खपत न के बराबर है

लॉकडाउन के चलते मंदिर, दरगाह और शादी बारात में सीमित लोगों की मंजूरी ने फूलों की मांग न के बराबर कर दी है। कहीं फूल खेतों में ही सूख रहे हैं तो कहीं बाजार तक आ रहे हैं, लोकल ट्रेन तथा अन्य परिवहन सेवा स्थगित के कारण राज्य के छोटे छोटे जगहों से फूल के क्रेता कम पहुंच रहे है जिससे बिक्री काफी कम होने लगा है अंत मे न बिकने के कारण किसान बचे फूलों को बाजार में ही फेंककर जाने को मजबूर होजा रहे है।

मल्लिक घाट में फूल बेच रहे दुकानदारों ने कहा कि हालत ठीक नहीं है, बिक्री काफी कम है। किसानों को फूल फेंककर जाना पड़ रहा है। बहुत खराब बाजार है। दिन भर बैठे रहते हैं, लेकिन बिक्री नहीं है। फूल बाजार में काम करने आने वाले श्रमिकों का कहना है कि फूलों की बिक्री बिल्कुल ठीक नहीं है। बिक्री हो रही है, लेकिन काफी कम।’ रात में फूलों की बिक्री कुछ हो रही है, लेकिन दिन में नहीं। पहले जैसी बिक्री नहीं हो रही है।’ दुकानदारों से बदतर हालत किसानों की है। ट्रेनों के बंद रहने के कारण कई किसान एक साथ छोटा हाथी में फूलों को लेकर फूल बाजार तक आ रहे हैं, लेकिन बिक्री काफी कम होने के कारण बचे फूलों को फेंक कर जाना पड़ रहा है। वहीं सड़क से आने के कारण उनका समय भी अधिक लग रहा है और खर्च भी। सड़क मार्ग से समय पर फूल मंडी नही पहुंच रहे है

नोट- इस महामारी में खुद को सुरक्षित रखने को लेकर देश में मध्यमवर्ग के लोग काफी हद तक प्रभावित है ।लेकिन ऐसे हालात में सुरक्षा और पेट भरने के लिए भोजन भी अत्यंत आवस्यक है अतः जो लोग अपने घरों से बाहर दो वक्त की रोटी के लिए निकल रहे है अपनी सुरक्षा स्वयम रखे।और अपने परिवार को भी सुरक्षा के दायरे में रखे।

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