जिंदगी पूरा जीना है तो बेफिक्र ओर खुश रहो

हम सभी का जीवन सतत प्रवाहशील है, जहां ढेरों खुशियों के बीच में हमारे जीवन में कई सारे दु:ख भी आते जाते रहते हैं।ऐसा नहीं है कि भगवान सिर्फ और सिर्फ दुःख, तकलीफ, कष्ट को ही सहने और झेलने के लिए हमें इस दुनिया में हमें भेजें हैं।आज हम दुःखी हैं तो कल हम खुश नहीं होंगे ऐसा नहीं है।हमारी जिन्दगी में कुछ भी स्थायी नहीं है।इसलिए स्वयं को हम क्यों कर तनावग्रस्त करें,जबकि ये भी हमें अच्छे से मालूम है कि आज भले ही हमारी परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी खराब क्यों नहीं हैं एक दिन
बदलेंगी जरूर…!
इस सच को कभी भी नकारा नहीं जा सकता है कि किसी भी परिस्थिति से हम सभी के लिए बच पाना संभव नहीं है, लेकिन सच्चाई ये भी है कि हम अगर चाहेंगे तो खुद को इस परिस्थिति से भावनात्मक संयम एवं आध्यात्मिकता के सहारे बच सकते हैं।हम सभी अपने अपने विचारों से बने हैं। हम जैसा सोचेंगे, वैसे ही बनेंगे।हमें अपनी सोच के दायरे को बड़ा करना होगा। जो अगर हम अपनी सोच को सीमित रखेंगे तो हम कभी भी अपने सपनों पूरा नहीं कर पाएँगे।हमें अपनी जिंदगी में जो अगर कुछ पाना है तो हमें हमेशा खुश रहना होगा और अपनी सोच के दायरे को बड़ा रखना होगा। हम जिस चीज के बारे में सोचेंगे, वही हमें मिलेगी।सुख के बारे में सोचेंगे तो सुख मिलेगा, दुःख के बारे में सोचेंगे तो दुःख ही मिलेगा।अच्छा सोचेंगे तो हमारे साथ अच्छा ही होगा और बुरा सोचेंगे तो बुरा ही होगा। यदि हम किसी चीज के बारे में सोचेंगे ही नहीं हैं तो हम उसे पा भी कैसे सकते हैं? हमें सफलता तभी मिल सकती है जब हम अपनी नकारात्मक सोच को त्यागकर स्वयं को इसके योग्य समझेंगे।हमारी एक सोच के बदलने मात्र से ही हमारे जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाएगा।यदि हम ये ठानकर चलें कि आज दिनभर हम जो भी सोचेंगे अच्छा ही सोचेंगे तो निश्चित ही हमारा दिन अच्छा जाएगा। यही प्रयोग हम सप्ताह भर के लिए भी कर सकते हैं,ऐसा करने मात्र से ही हम सभी के जीवन में अद्भुत परिवर्तन आ जाएगा।

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